अमर शहीद ठाकुर दरियाव सिंह का 169वां बलिदान दिवस मनाया गया।

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संवाददाता माधव निषाद:-फतेहपुर अमर शहीद ठाकुर दरियाव सिंह का 169वां बलिदान दिवस  स्मारक स्थल खागा पर मनाया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्रीमती कृष्णा पासवान विधायक खागा, विशिष्ट अतिथि श्री गया प्रसाद 'सनेही' साहित्यकार व श्रीमती गीता सिंह  नगर पंचायत अध्यक्ष खागा रही।
 कार्यक्रम का संचालन शी महेंद्र नाथ त्रिपाठी जी ने किया इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष डॉ. राजकुमार सिंह जी की पुस्तक "राजनीति का धर्म और धर्म की राजनीति" का विमोचन किया गया। समिति के मंत्री राम प्रताप सिंह  और अशोक सिंह ने ठाकुर दरियाव सिंह और उनके पुत्र सुजान सिंह के 1857 की क्रांति के संघर्षऔर उनके बलिदान पर प्रकाश डाला।जनपद फतेहपुर के 1857 की क्रांति के महानायक अमर शहीद ठाकुर दरियाव सिंह का जन्म 1795 ईस्वी में खागा गढ़ी के प्रतिष्ठित क्षत्रिय ताल्लुकेदार ठाकुर मर्दन सिंह के यहां हुआ।ठाकुर मर्दन सिंह के दो पुत्र ठाकुर दरियाव सिंह व ठाकुर निर्मल सिंह थे ।ठाकुर दरियाव सिंह की पत्नी का नाम सुगंधा था जिनसे दो पुत्र ठाकुर सुजान सिंह व ठाकुर देव सिंह हुए।
    जनपद फतेहपुर 10 नवंबर 1801 ई तक अंग्रेजों द्वारा शासित रहा इसके बाद खागा ताल्लुका 1802 से ठाकुर दरियाव सिंह के पूर्वजों के नाम रहा और ताल्लुकेदार रहे ।10 मई1857 को सत्तावनी क्रांति का आगाज हुआ।
   8 जून 1857 का पावन दिवस जिस दिन फतेहपुर जनपद का एक भूभाग खागा अंग्रेजों से मुक्त हुआ खागा के आसपास की जनता और विद्रोही सैनिकों ने ठाकुर सुजान सिंह के नेतृत्व में खागा तहसील के राजकोष पर अपना अधिकार कर लिया तत्कालीन तहसीलदार पंडित रामनारायण ने  नत्थू बेग चपरासी और नूर मोहम्मद मिरधरा के द्वारा ठाकुर सुजान सिंह से सरकारी कोष न लूटने की प्रार्थना की किंतु प्रार्थना ठुकराते हुए रेलवे इंजीनियरों तथा अन्य अंग्रेजी अधिकारियों के बंगले तथा सरकारी कार्यालय जला दिए गए और समस्त सरकारी सामान पर अधिकार कर लिया गया इस विजय अभियान में खागा के आसपास के ग्रामों की जनता ने पूरा सहयोग किया तथा ठाकुर दरियाव सिंह के सहोदर ठाकुर निर्मल सिंह पुत्र ठाकुर देव सिंह और सुजान सिंह, पारिवारिक सदस्य ठाकुर रघुनाथ सिंह, ठाकुर बख्तावर सिंह, ठाकुर बहादुर सिंह, ठाकुर रणजीत सिंह, ठाकुर उजागर सिंह, ठाकुर दीना सिंह, ठाकुर ज्ञानी सिंह, ठाकुर पोखम सिंह खागा के साधारण जन  बैजू ,सुक्खन कोरी , ननका, सुखवा ,मेहमान, गंगादीन, नारायण ,लाल मोहम्मद यासीन, मियां बख्श तथा सरसई के ठाकुर ईश्वरी सिंह ठाकुर खुशहाल सिंह ,हिम्मत सिंह, मथुरा,नन्हे आदि व्यक्तियों ने प्रमुख रूप से अपना योगदान दिया। तत्कालीन थानेदार खागा खुर्शीद अली द्वारा 4 व 5 फरवरी 1858 को दर्ज की गई रिपोर्ट में उपरोक्त तथ्यों पर प्रकाश पड़ता है।
      खागा के अधिकार के बाद ठाकुर दरियाव सिंह व उनके पुत्र सुजान सिंह ने ठाकुर  शिवदयाल सिंह जमरावा, ठाकुर जोधा सिंह अटैया रसूलपुर व तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर हिकमत उल्ला खा के सहयोग से 9 जून को फतेहपुर को चारों ओर से घेर लिया। अंग्रेज कलेक्टर मिस्टर जे. डब्ल्यू. शेरर और अन्य अधिकारी रात को ही यमुना पार कर बांदा की ओर भाग गए। अंग्रेज जज मिस्टर टक्कर बाबा गयादीन दुबे  कोराई से सहायता मांगने गया किंतु उसे कोई सहायता ना मिली उसी रात मिस्टर ठक्कर ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।  इसी आधार पर बाद में देशभक्त बाबा गयादीन दुबे की गिरफ्तारी हुई थी ।10 जून 1857 ई को ठाकुर सुजान सिंह ने अपने सैनिकों और साथियों के साथ जिला जेल पहुंचकर बंदियों को मुक्त कराया तथा कचहरी और राजकोष पर अधिकार कर लिया।इस प्रकार संपूर्ण फतेहपुर अंग्रेजों से मुक्त हुआ तथा तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर हिकमत उल्ला खा को आजाद फतेहपुर का कलेक्टर बनाया गया। संपूर्ण फतेहपुर 32 दिनों तक ठाकुर दरियाव सिंह के शासन में रहा।
       12 जुलाई 1857 को अंग्रेजों ने पुनः फतेहपुर में अधिकार कर लिया और कलेक्टर हिकमत उल्ला खा का सर कलम कर फतेहपुर कोतवाली में लटका दिया।
      5 जनवरी 1858 को ठाकुर दरियाव सिंह अपने पुत्र  सुजान सिंह के साथ किसी कार्य हेतु खागा आए हुए थे किसी मुखबिर की सूचना पर भोजन करते समय उनको गिरफ्तार कर लिया गया जिसमें ठाकुर दरियाव सिंह ,पुत्र सुजान सिंह, भाई निर्मल सिंह, भतीजे बख्तावर सिंह,रघुनाथ सिंह, तुरंग सिंह पर 9 आरोप लगाए गए। एक माह तक न्याय का झूठा स्वांग रच कर 6 मार्च 1858 को जिला जेल फतेहपुर में फांसी दे दी गई।भारत माता के अमर वीर सपूत देश के लिए बलिदान हो गए।

जिला जेल फतेहपुर में समिति के मंत्री राम प्रताप सिंह के नेतृत्व में बलिदान दिवस का कार्यक्रम किया गया।इसमें संगठन मंत्री ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ,धर्मेंद्र सिंह जी रहे। 
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के उपरांत कविसम्मेलन का आयोजन किया गया।कवि सम्मेलन के संयोजक समिति के उपाध्यक्ष महेंद्र नाथ त्रिपाठी रहे ।संचालन नीरज पांडेय जी(रायबरेली) ने किया।कवियोँ में श्री शिवकिशोर तिवारी खंजन बाराबांकी, श्री दुष्यंत शुक्ल सिंघनादी, श्री शिव शरण बंधु फतेहपुर, श्री हरिबहादुर सिंह हर्ष प्रतापगढ़,श्री अभिजीत मिश्र प्रयागराज, श्री सौरभ शुक्ल रायबरेली, श्री शिवम हथगामी, श्री समीर शुक्ल फतेहपुर, श्री कुमार सौष्ठव फतेहपुर, श्री मोहित तिवारी खागा ने अपनी ओज पूर्ण काव्यधारा से श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। हरिबहादुर हर्ष ने कहा- आंच आन पसर यदि आये तो रणभेरी बजवाओ, खंड खंड उद्दंड शत्रु हो पौरुष दिखलाओ। सौरभ शुक्ल ने कहा-सन अट्ठारह सौ सत्तावन में जिनका कण कण जागा है।दरियाव सिंह की जन्मभूमि यह पावन धरती खागा है।समीर शुक्ल ने कहा-कर गये है जसलवा कायम गुलजार वतन करते है, दरियाव सिंह ठाकुर को सौ नार नमन करते  है। कुमार सौष्ठव  ने  कहा-है नमन शहीदों के चरणों में जाग्रत भाव रहे, जब तक सूरज चांद रहे, अमर वीर दरियाव रहे। नीरज पांडे ने कहा-इस देश का मान बढ़ा गए जो कविता में उन्ही की कहानी लिखेंगे।शिव शरण बंधु हथगामी ने कहा-ए वतन तू जब भी चाहे आजमा कर देख ले,इक तेरी आवाज पर हम खाक में मिल जायेंगे। शिव किशोर तिवारी खंजन जी ने कहा-मिले यदि प्रेम का प्याला ज़हर भी जाम होता है।दुष्यंत शुक्ल सिंघनादी ने कहा-कविता उनके नाम लिखूं जो बारूदों पर लेटे है। भुजदंडों में भारत का स्वर्णिम सम्मान समेटे है। डॉ शिवम हथगामी ने कहा-हम सब की तमन्ना है निवेदन भी यही है,खग का नाम ठाकुर दरियाव नगर हो।अभिजीत मिश्र ने कहा- अंग्रेजों की इसलिये तो नीति नजर नही आई, बत्तीस दिन अंग्रेजों की बत्तीसी नगर नही आई। मोहित तिवारी ने कहा- चलाई जिसने पहली खुद की सरकार बत्तीस दिन,सुनो खग के अपने शेर-ए दिल दरियाव जिंदाबाद। इस अवसर पर  अजय त्रिपाठी, परमहंस सिंह, राजेन्द्र सिंह, फूलचंद्र पाल, रामरूप सिंह, श्याम सनेही गुप्त नरेन्द्रसिंह,हीरालाल गुप्त, रामचंद्र जी, उमेश मौर्य, गजेंद्र सिंह,सुभाष मौर्य, योगेंद्र कुमार, राम लखन त्रिपाठी, शिवकरण , रामचंद्र सिंह,शिव बहादुर सिंहआदि सैकड़ों गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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