जच्चा-बच्चा की मौत, स्वजनों ने बताया किस्मत का खेल
-इस अस्पताल से उस अस्पताल रहे दौड़ते नहीं बची जान
-कमीशन एजेंटों ने भ्रम में डालकर निजी अस्पताल ले गए
फतेहपुर के किसी भी कार्य के लिए सलाह आपके जीवन की दिशा बदल सकती है। राम नगर कौहन के अभ्भी का डेरा गांव निवासी सोहन की जिंदगी एक गलत सलाह से बर्बाद हो गयी। एक गलत सलाह के चलते चंद घंटों में सोहन अपनी पत्नी व नवजात बच्चे को खो बैठा। सही सलाह मिली होती तो शायद वह आज खुशहाल होता।
अभ्भी के डेरा में सनेही का भरा परिवार है। इनके पुत्र सोहन की पत्नी को प्रसव होना था, लेकिन शरीर में खून की कमी के कारण हालत गड़बड़ थी। सोहन ने अपनी पत्नी सीता को प्रसव के लिए सरांय खालिस सीएचसी में भर्ती कराया था। यहां के चिकित्सकों ने हालात गंभीर बताकर जिला महिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। लेकिन कुछ कमीशन एजेंटों ने उसे बर्गलाकर निजी अस्पताल में उपचार कराने के लिए राजी किया। फिर क्या था जच्चा-बच्चा की मौत हो गयी। सोहन कहता है कि अगर वह कुछ लोगों की सलाह न मानता और जिला अस्पताल जाता तो उसकी पत्नी को निश्शुल्क ब्लड भी मिलता और जान भी बच जाती। लेकिन निजी हास्पिटल ने पैसे भी जमा करा लिए खून भी नहीं चढ़ाया और पत्नी की मौत हो गयी। स्वजन अब इसे किस्मत का लेखा मानकर चुप है।
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