अजवापुर चीनी मिल में किसानों के आंदोलन का बड़ा असर: पहले दिन नहीं पहुंची एक भी गन्ने की ट्रॉली, पसरा सन्नाटा

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  • लागत के अनुसार गन्ना मूल्य ₹400 से ₹600 प्रति क्विंटल घोषित करने पर अड़े किसान
  • भारतीय किसान यूनियन भूमिपुत्र का ऐलान—मांग पूरी होने तक जारी रहेगा संघर्ष

लखीमपुर खीरी। गन्ना समर्थन मूल्य में वृद्धि की मांग को लेकर किसानों का आक्रोश अब सड़कों पर असर दिखाने लगा है। अजवापुर चीनी मिल में चल रहे किसानों के आंदोलन के चलते पेराई सत्र की शुरुआत पर गहरा असर पड़ा है। आंदोलन के व्यापक प्रभाव के कारण अभी तक मिल परिसर में किसानों की एक भी गन्ने से लदी ट्रॉली नहीं पहुंची, जिससे पूरे मिल परिसर में सन्नाटा पसरा हुआ है।

बढ़ती लागत और महंगाई से किसान परेशान प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि डीजल, खाद, कीटनाशक और जुताई-बुवाई की लागत कई गुना बढ़ चुकी है। लगातार बढ़ती महंगाई के मुकाबले वर्तमान गन्ना मूल्य नाकाफी साबित हो रहा है, जिससे किसान कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं। जब तक सरकार और मिल प्रशासन लागत के अनुपात में लाभकारी मूल्य तय नहीं करते, तब तक मिल को गन्ना आपूर्ति नहीं की जाएगी।

₹400 से ₹600 प्रति क्विंटल भाव की मांग आंदोलन का नेतृत्व कर रहे भारतीय किसान यूनियन भूमिपुत्र (अराजनैतिक राष्ट्रीय संगठन) ने किसानों के हक में आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। संगठन के जिलाध्यक्ष मोहित राव ने स्पष्ट किया कि किसानों की मांग गन्ने का भाव 400 से 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की है।

उन्होंने दो टूक कहा, "जब तक किसानों को उनकी मेहनत और फसल का उचित व वाजिब दाम नहीं मिल जाता, तब तक यह आंदोलन थमेगा नहीं। किसान अपने हक की लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ेंगे और मांग पूरी होने तक मिल गेट पर यह गतिरोध जारी रहेगा।"

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