प्रदेश में आलू विकास की योजनाओं एवं अनुदान के लिए नया पोर्टल विकसित

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लखनऊ। प्रदेश में आलू उत्पादक किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से उपलब्ध कराने तथा योजनाओं के पारदर्शी एवं सफल क्रियान्वयन के उद्देश्य से उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा नव विकसित पोर्टल शुरू किया गया है। किसान विभिन्न आलू विकास योजनाओं से संबंधित जानकारी एवं आवेदन पोर्टल potato.uphorticulture.in के माध्यम से कर सकेंगे।
प्रदेश सरकार द्वारा भावसहाय्य भाव स्थिरता कोष की स्थापना की योजना के तहत आलू उत्पादक किसानों को राहत प्रदान करने की व्यवस्था की गई है। योजना के अंतर्गत प्रदेश के समस्त जनपदों के पात्र आलू उत्पादकों को निर्धारित मानकों के अनुसार लाभ दिया जाएगा। प्रति कृषक अधिकतम 02 हेक्टेयर आलू रोपित क्षेत्रफल अनुमन्य है तथा अधिकतम 240 कुंतल प्रति हेक्टेयर उपज के आधार पर अधिकतम 200 कुंतल तक अनुदान दिए जाने की व्यवस्था है।योजना का लाभ लेने के लिए किसान का पोर्टल पर पंजीकृत आलू उत्पादक एवं आईडी धारक होना आवश्यक है। आवेदन के लिए आधार कार्ड, बैंक पासबुक, रोपित आलू क्षेत्रफल की खसरा-खतौनी तथा आलू कृषक द्वारा व्यापारी एवं आलू कृषक के मध्य क्रय-विक्रय का विवरण सहित आवश्यक अभिलेख उपलब्ध कराने होंगे।इसी क्रम में निजी शीतगृहों में भंडारित आलू के भंडारण प्रभार पर अनुदान की योजना भी लागू की गई है। योजना के तहत निजी शीतगृहों में भंडारित आलू पर भंडारण प्रभार में छूट का लाभ दिया जाएगा। पात्र किसान को अधिकतम 02 हेक्टेयर क्षेत्रफल एवं 200 कुंतल तक आलू के आधार पर निर्धारित दर से अनुदान देय होगा। योजना के अंतर्गत प्रति कृषक अधिकतम ₹20,000 तक अनुदान का प्रावधान है।
विभाग द्वारा योजना का लाभ पात्र किसानों तक पहुंचाने के लिए ऑनलाइन सत्यापन एवं बैंक खाते में सीधे अनुदान भुगतान की व्यवस्था की गई है। शीतगृह में भंडारित आलू की मात्रा का निर्धारण शीतगृह द्वारा निर्मित कच्ची के आधार पर किया जाएगा तथा निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने वाले पात्र किसानों को अनुदान का लाभ मिलेगा।
जिला उद्यान अधिकारी रमेश पाठक ने बताया कि आलू उत्पादक किसान योजनाओं की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया एवं आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी के लिए विभागीय पोर्टल पर आवेदन करें। किसी भी समस्या की स्थिति में जिला उद्यान अधिकारी से संपर्क किया जा सकता है।

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