तिन्दवारी/बाँदा
कुस्सेजा धाम के महंत की त्वरित सूझबूझ और सूझवान निर्णय से एक प्राचीन आश्रम को भूमि माफियाओं और असामाजिक तत्वों के कब्जे में जाने से बचा लिया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आश्रम के दिवंगत शिष्य ने अपने देह त्यागने (महाप्रयाण) से पूर्व ही आश्रम और उससे संबद्ध समस्त भूमि का स्वामित्व कानूनी रूप से कुस्सेजा धाम के महंत श्री परमेश्वर दास जी महाराज के नाम कर दिया था। परंतु, शिष्य के आकस्मिक निधन के बाद स्थानीय असामाजिक तत्वों और कुछ ग्रामीणों की नीयत डोल गई और वे आश्रम की कीमती जमीन पर अवैध कब्जा करने पर उतारू हो गए।
जैसे ही इस संवेदनशील मामले की भनक कुस्सेजा धाम के पूज्य महंत जी को लगी, उन्होंने बिना कोई समय गंवाए प्रशासनिक और व्यावहारिक सूझबूझ का परिचय दिया। महंत जी ने तत्काल प्रभाव से सरकारी नियमों के तहत मंदिर व आश्रम की भूमि की विधिवत नाप-जोख (पैमाइश) करवाई। अवैध कब्जे के प्रयास को पूरी तरह विफल करते हुए, उन्होंने आश्रम के कायाकल्प और भव्य सौंदर्यीकरण की एक ठोस योजना तैयार की। वर्तमान में इसी योजना के अंतर्गत आश्रम परिसर में सुन्दरीकरण का कार्य बेहद तीव्र गति से कराया जा रहा है, जिससे न सिर्फ सनातन संस्कृति की धरोहर सुरक्षित हुई है, बल्कि पूरे क्षेत्र मेंहर्षका माहौल है
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