फतेहपुर नगर पालिका अभिलेखों में नगर क्षेत्र में कुल 281 तालाब दर्ज हैं, जो कभी शहर की प्राकृतिक जल निकासी का मजबूत आधार थे। शहरी विस्तार के नाम पर इन तालाबों को पाटकर कॉलोनियां, मैरिज हाल, होटल एवं विद्यालय बना दिए गए, जिसके परिणामस्वरूप वर्तमान में 50 तालाब भी मौके पर चिन्हित नहीं हो पा रहे हैं। इसी कारण नगर क्षेत्र में जलभराव की समस्या विकराल रूप ले चुकी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर मुख्य सचिव द्वारा महायोजना–2031 में तालाबों का विवरण एवं नक्शा शामिल करने के निर्देश भी दिए जा चुके हैं।
👉 19 जनवरी 2026 को नगर क्षेत्र में तालाबों पर अवैध कब्जों की शिकायतों के संबंध में, राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) के आदेश के अनुपालन में जिला प्रशासन द्वारा 9 सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया।
समिति ने विभिन्न गाटा संख्याओं में दर्ज तालाबों का मौके पर भौतिक सत्यापन किया।
जांच में पाया गया कि
गाटा संख्या 2575 (लगभग 14 बीघा) में से केवल 9 बीघा तालाब शेष, शेष भूमि पर अवैध कब्जा
गाटा संख्या 2547 पर पुराई कर कब्जा करने का प्रयास
गाटा संख्या 2520 (लगभग 9 बीघा) में से केवल 5 बीघा तालाब शेष, बाकी पर कब्जा
गाटा संख्या 1708 व 1677 (कुल लगभग 19 बीघा) के तालाबों पर भी अवैध कब्जे की पुष्टि
जांच के समय तहसीलदार अमरीश कुमार, नायब तहसीलदार, कानूनगो एवं संबंधित लेखपाल उपस्थित रहे।
👉 एनजीटी में इस प्रकरण की सुनवाई कल प्रस्तावित है, जिसमें जांच समिति की रिपोर्ट एवं प्रशासनिक कार्रवाई की स्थिति पर विचार किया जाएगा। नगरवासियों की निगाहें इस सुनवाई पर टिकी हैं, क्योंकि यह मामला न केवल पर्यावरण संरक्षण, बल्कि शहर की जलनिकासी व्यवस्था और भविष्य की आपदाओं से भी सीधे जुड़ा हुआ है।
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